Sunday, July 10, 2022

हरियाणा में सुपर फास्ट एक्सप्रेस हाईवे बनकर तैयार, इन 8 जिलों के लोगों को होगा फायदा

 National Greenfield Express Highway 152-D: कुरूक्षेत्र | हरियाणा को जल्द ही सबसे बड़ा सुपर फास्ट एक्सप्रेस हाईवे मिलने जा रहा है। खास बात यह है कि इस एक्सप्रेस हाईवे पर धीमी रफ्तार की गाड़ियों की एंट्री नही होगी। एक्सप्रेस हाईवे पर हल्के गाड़ियों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। वाहन इस एक्सप्रेस हाईवे पर गोली की रफ्तार से दौड़ती नजर आएंगी। 

हरियाणा के नारनौल से कुरुक्षेत्र जिले के ईस्माईलाबाद के बीच बन रहे नेशनल ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेस हाईवे 152 D का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस 6 लेन वाले एक्सप्रेस हाईवे का निर्माण अंबाला-कोटपुतली इकोनोमिक कारिडोर के लॉजिस्टिक हब बनाने को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। 230 किलोमीटर के इस राजमार्ग को नारनौल दक्षिण पश्चिम से कुरुक्षेत्र उत्तर पूर्व के गंगहेड़ी तक बनाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से इस राजमार्ग के निर्माण के लिए 5108 करोड़ के बजट का निर्धारण किया गया था। 70 मीटर चौड़ाई वाले इस एक्सप्रेस हाईवे पर 122 ब्रिज और अंडरपास बनाए गए है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह एक्सप्रेस हाईवे इसी महीने में शुरु हो सकता है। 

हरियाणा के 8 जिलों को होगा फायदा

नेशनल ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेस हाईवे 152 D से हरियाणा के कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, जींद, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ जिले से होकर गुजरेगा। हाईवे के शुरु होने से खास तौर पर इन आठ जिलों के लोगों को फायदा होगा। यह हाईवे नारनौल बाईपास पर नेशनल हाईवे 148B से लिंग का करेगा। हाईवे के शुरू होने के बाद जयपुर-नारनौल-अंबाला-चंडीगढ़ का सफर काफी आसान हो जाएगा।

धीमी गति के वाहन वर्जित

नेशनल ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस हाईवे को हाई स्पीड एक्सेस कंट्रोल कोरिडोर के रूप में बनाया गया है, जिस कारण इस राष्ट्रीय राजमार्ग में धीमी गति वाले वाहनों जैसे मोटरसाइकिल, दुपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों, गैस मोटर चालित वाहनों, ट्रेलर के साथ या ट्रेलर के बिना ट्रैक्टर, बहु धुरिया हाइड्रोलिक ट्रेलर वाहन, क्वाड्री साइकिल का चलना वर्जित किया गया है। एक्सप्रेस-वे पर धीमी गति की वाहनों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए प्रशासन की ओर से यह निर्णय लिया गया है




चंडीगढ़ और जयपुर तक का सफर अब हो जायेगा बेहद आसान

 152-D एक्सप्रेस-वे के शुरू होने पर चरखी दादरी और दक्षिण हरियाणा के लोगों का चंडीगढ़ और जयपुर तक का सफर बेहद सुहावना हो जाएगा



14 एंट्री व एग्जिट पाॅइंट, वहीं पर देना होगा टोल


इस एक्सप्रेसवे पर कुल 14 एंट्री व एग्जिट प्वाइंट बनाए गए हैं. ये एंट्री व एग्जिट पाॅइंट 7 नेशनल हाईवे व 7 स्टेट हाईवे पर बनाए गए हैं. बीच में कहीं पर भी टोल नाके नही बनाए गए हैं. हाईवे के नीचे सर्विस लेन पर जहां एंट्री-एग्जिट पाॅइंट बनाए हैं वहीं पर टोल टोक्स देना पड़ेगा. इस से वाहन चालकों को परेशानी नहीं होगी और समय भी बचेगा.


ये रहेंगे एंट्री व एग्जिट पाॅइंट


• गंगहेड़ी के पास नेशनल हाईवे हिसार-चंडीगढ़ रोड से स्टार्ट डी पाॅइंट

• थानेसर-पिहोवा रोड स्टेट हाईवे 06

• ढांड-करनाल-पटियाला रोड स्टेट हाईवे 33

• पूंडरी के समीप कैथल-करनाल स्टेट हाईवे 08

• असंध-कैथल रोड स्टेट हाईवे 11

• करनाल-असंध-जींद नेशनल हाईवे-709ए

• सफीदो-जींद रोड स्टेट हाईवे 16


• जींद-गोहाना ग्रीन फील्ड नेशनल हाईवे

• जींद-रोहतक नेशनल हाईवे जुलाना के समीप

• गोहाना-महम रोड रोड स्टेट हाईवे 16

• रोहतक-हिसार नेशनल हाईवे 9

• रोहतक-भिवानी नेशनल हाईवे 709

• समसपुर-चरखीदादरी नेशनल हाईवे 334 बी

• अटेली-महेंद्रगढ़ स्टेट हाईवे


इन जिलों को मिलेगा फायदा


152-D एक्सप्रेस-वे के शुरू होने पर दक्षिण हरियाणा के जिलों नारनौल, महेन्द्रगढ़, रेवाड़ी के लोगों का चंडीगढ़ तक का सफर बेहद सुहावना हो जाएगा. इसी तरह से अम्बाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, जींद, आदि जिलों के लोगों के लिए दक्षिण हरियाणा के जिलों में आवागमन बेहद आसान और कम समय में तय होगा. इस नेशनल हाईवे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हाईवे प्रदेश के किसी भी शहर को टच नहीं करेगा.


1033 पर कॉल करने पर मिलेगी मदद


सुरक्षा की दृष्टि से इस एक्सप्रेसवे पर विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी. हाइवे पर प्रत्येक एक किलोमीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. किसी भी दुर्घटना की सूरत में तुरंत रिस्पांस मिलेगा. हाइवे पर 24 घंटे एंबुलेंस की सुविधा रहेगी. सफर के दौरान किसी प्रकार की असुविधा होने पर 1033 पर फोन करके मदद ली जा सकती है.

Friday, July 8, 2011

ब्याह


बाबा पीर की जय
म्हारे गामां के ब्याह के बारे में पूरा लेखा-जोखा, हिसाब-किताब अर् ब्याह जडअ् तै ष्षुरू होवे ओडे तै लैके आखर तक पहंुचाण की कोषिष करी सै, उम्मीद सै तामनै जरूर पंसद आवगी

संदीप कंवल भुरटाना
ब्याह
हर किसे कअ् चड्ढे चा,
जद होंदा होवै ब्याह,
गांमा की पुराणी रीत,
घरां गाए जावैं गीत,
सात-ग्यारह दिन का लग्न आवै,
छींक -छीक के नै मिठाई खावैं,
फेर दैंव घर आले बाना,
मीठा भैके रोटी खाणा,
चिन्ता भी फेर रोज हौवे,
उन दिनां म्हं मौज हौवे,
ब्याह तै पहलड़ा दिन भातियां का आणा,
गाम आलां का खाणा चालू करवाणा,
फेर मामे भरैं भात,
ब्होत करणी पडै़ खुबात,
भाई-बाहण कै सहारा लावै,
बूढ़ला की रीत निभावै,
लिखें भात खुलैं बही,
उसे रात फेर चढे तई,
गुड़ चीनी की चाष्णी छणे,
लाडू, जलेबी मिठाई बणे,
कोए बोचण म्हं फैदा ठाज्या,
अंधेरा म्हं लाडू खाज्या,
ब्याह का बड़ा मीठा खेल,
पहलड़ा दिन नै कहवां मेल,
बाने काढे गिण-गिण,
फेर आवै ब्याह आला दिन,
पहलां बनड़ा का तैल तारैं,
फोटू आलै भी झिमका मारैं,
सारे सिंगर डोल कै होज्या तैयार,
काडदे बनड़ा का त्यौहार,
बनड़ा नै नाई नुवांवै,
आच्छा साबण पाणी लावैं,
लाल लत्ता सिर उड़ा रै,
फेर मामा पाटड़ा पै तै तारै,
फेर बनडा कै जींजा की आवै बारी,
पहला टोपी मंदिर जाण की तैयारी,
चढ़ घोड़ी मंदिर म्हं जाणा,
फेर भगवान नै षीष नवाणा,
डीजै पै बाजै गाणे हिट,
यार दैवं सारे गिफट,
भाभी आंख्या म्हं कालस घालै,
मांगै नेक फेर नाड़ हालै,
फेर बाराती चालै होके लैट,
आगलै गामै फेर हौवे फेट,
करकै नै पूरी खुबात,
आगलै गांम फेर पहुचै बारात,
औडे मिलणी पै बुढे आवैं,
माला घाल गलै मिल जावैं
खातिरदारी की पहली निषानी,
कंपा कोला और षरबत का पानी,
दैव सालै जतावैं प्यार,
मिनट म्हं कहवै रिष्तेदार,
फेर पंडत जी आवैं,
रस्मुना सा करकै जावैं,
थोड़ी पुराणी रीत निभावैं,
बरी का सामान भी ले ज्यावैं,
फैर हौवे फेरां की तैयारी,
ब्हुंआ कें सिंगार म्हं टेम लागै भारी,
छोरे भी डीजै पै गाणै लगवांवै,
नाच-नाच के धूमैं ठावैं,
घणखरे ब्होत ए माच्चैं,
बेतल मुंह कअ् लाकै नाच्चै,
आज्या छोरीआलां का घर,
ढोलकियां की आरी मर,
फेर साली निम झारैं,
जोर का फटकारा मारैं,
एक रिबन भी कटवांवै,
राम दणी सी नैक लेज्यावैं,


कई छोरे अल्बाध कर ज्यावैं,
सपरे मार धोली कर ज्यावैं,
मजै आवैं जिब भतेरे,
फेर षुरू हो ज्यावैं फेरे,
छोरी नै लेके मामा आवै,
राम दणी सी पाटड़ा पै बिठावै,
पंडत जी ब्होत बार लगावै,
पिसे देदीं ए फेरे तावले करावै,
छोरी आलै दैंव ब्होत सामान,
फेर वो घालै कन्यादान,
घणी गर्मी म्हं चालै बीजणे,
सरी लुगाई दैंव सिटणे,
बनडे की बेबे ए,,,,,,,,,
भीड़ म्हं नहीं मिलै सीट,
फेर छोरी दैंव गिफट,
कैमरा आला गैंल्या करैं कैंस,
बोली खाली ना मारिए फलैस,
घूम-घूम सात फेरें हो ज्यावैं,
फेर सारे बाराती खाणा खावैं,
मेल-जोल म्हं होवैं सब फिदा,
आखर म्हं फेर हौवे विदा,
बूढे़-बडेरे की हौव मान तान,
कांबल, गुट्ठी का हौव दान,
लाल-लाल सी ठावै किताब,
सारै ब्याह का हौव हिसाब,
फेर आखरी घड़ी सै आई,
बारात की फेर हौव विदाई,
सबकी आंख्या म्हं आंसू आवैं,
जिद घर तै एक आदमी जावैं,
कुछैक घंटा म्हं मिटै चा,
न्यू हो ज्यावै सै भाईयों ब्याह,
हर किसे कअ चडढे चा,
जद होंदा हौवे ब्याह।।।।।।

संदीप कंवल भुरटाना

Wednesday, December 15, 2010

घुंघट की आड़ में तस्करी

* नशे की अंधेरी दुनिया में उजाला खो रही हैं बहुत सी महिलाएं
* तस्करी के आरोप में दो साल में 60 महिलाएं काबू
सिरसा \घुंघट की आड़ में महिलाएं मादक पदार्थों की तस्करी कर रही हैं। चूल्हे की चौखट से बाहर निकलकर महिलाएं नशे की अंधेरी दुनिया में भी कदम रख चुकी हैं। अकेले सिरसा जिला में पिछले दो बरस में ही पुलिस ने पांच दर्जन महिलाओं को तस्करी के आरोप में दबोचा है। सूबे में दो बरस में करीब 250 महिलाओं को तस्करी करते हुए धरा गया है। ऐसे में नशे की शुष्क बंदरगाह के रूप में बदनाम हो चुके जिला सिरसा में सीमावर्ती इलाकों में महिलाएं तस्करी जैसे गोरखधंधे में बड़े पैमाने पर संलिप्त हो रही हैं। दरअसल सिरसा जिला पंजाब व राजस्थान की सीमा से सटा है। तस्करी के लिए यह इलाका बंदरगाह के रूप में बदनाम है। नशे के ट्रांजिट प्वाइंट बने इस इलाके में अब महिलाएं भी तस्करी करने लगी हैं। वर्ष 2008 में जिला पुलिस ने 45 जबकि पिछले साल 15 महिलाओं को तस्करी करते हुए दबोचा। पुलिस सूत्रों के अनुसार पंजाब से सटे रोड़ी, डबवाली, कालांवाली इलाके में अब बड़े तस्कर महिलाओं को माध्यम बनाने लगे हैं। बहुत से तस्कर अपनी बीवी आदि का सहारा लेते हैं तो बहुत सी महिलाएं आॢथक महत्वाकांक्षा के चलते इस नापाक धंधे में कूद रही हैं। दबी जबान में पुलिस जवान यह भी स्वीकारते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में कम नाकेबंदी एवं पर्याप्त महिला पुलिस बल न होने के चलते भी बहुत बार महिला तस्कर पुलिस के चंगुल से निकल जाती हैं। इस समय जिला में 1200 के करीब पुलिस बल है। महिला पुलिस बल की संख्या सैंकड़े से भी कम करीब 80 है। जिला में महज एक ही पुलिस इंस्पैक्टर एवं चंद महिला सब इंस्पैक्टर है। ऐसे में नाकेबंदी के दौरान बहुतेरी बार पुरुष पुलिस कर्मी संदिग्ध महिलाओं की तलाशी नहीं ले सकते। वैसे राज्यभर में भी कुल 42 हजार पुलिस बल में से महिला पुलिस बल की संख्या करीब 1700 ही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो डबवाली, कालांवाली जैसे इलाकों में बहुत सी महिलाएं छुपाकर मादक पदार्थ लेकर आती हैं और उसे सीमा बार दूसरे सूबे पंजाब में ले जाती हैं। वर्ष 2008 में डबवाली सदर पुलिस ने दर्जन भर से अधिक ऐसी महिलाओं को काबू किया जो पंजाब से ताल्लुक रखती थी। इनमें से बहुत सी इस धंधे में अपने पति या किसी अन्य रिश्तेदार के नशे की लत की जकडऩ की वजह से आईं। इस गोरखधंधे से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि अब बहुत से तस्कर महिलाओं की मदद लेने लगे हैं। ऐसा करने से उन्हें थोड़ी आसानी होती है। अधिक सेफ्टी रहती है और वे पुलिस को चकमा भी देने में कामयाब हो जाते हैं। ओढां थाना के प्रभारी बताते हैं कि 'बहुत से तस्कर अपनी बीवी, भाभी, बहन की मदद के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी करते हैं।Ó उन्होंने जोड़ा कि अधिकांश महिलाएं किसी तस्कर के संपर्क में आकर या अपने पति की नशे की लत की पूूॢत करने के लिए तस्करी करती हैं। उन्होंने बताया कि कुछ अरसा पहले उन्होंने एक महिला को एक किलोग्राम चूरापोस्त सहित काबू किया था। उस महिला की आॢथक दशा दयनीय थी और उसका पति नशे की लत से ग्रस्त था और स्वयं तस्करी करने में असमर्थ हो गया। ऐसे में उस महिला को अपने पति की नशे की लत की पूॢत के लिए तस्करी जैसे नापाक धंधे में कूदना पड़ा।
ङ्क्षचताप्रद बात यह भी है कि जहां तस्करी जैसे गोरखधंधे में महिलाओं की संलिप्तता बढ़ी है, वहीं कालांवाली, रोड़ी जैसे इलाकों में कुछेक महिलाएं नशे की जकडऩ में भी हैं। नशा मुक्ति केंद्र कालांवाली की प्रभारी वीरपाल कौर बताती हैं कि 'उनके केंद्र में सालभर में करीब आधा दर्जन से अधिक महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। अधिकांश महिलाओं को भूक्की एवं नशे की गोलियों की लत होती है।Ó जाहिर है कि नशे का यह धंधा मौत के सौदागरों के लिए मुनाफे का धंधा बन गया है और वे अब इसमें महिलाओं का भी आश्रय लेने लगे हैं। यह भी जाहिर है कि इस दिशा में पुलिस को शिद्दत के साथ प्रयास करने होंगे।
Sandeep Bhurtana

राजस्थान से मोल पानी लाने की लाचारी,* राजस्थान सीमा से सटे दर्जनों गांवों में पानी ने लोगों को रुलाया

* सिंचाई के अभाव में गेहूं के उत्पादन पर पड़ेगा असर, ताल सूखे, नहरों में नहीं पानी सिरसा : राजस्थान की सीमा से सटा हुआ गांव है गुसाईंआना। बरानी जमीन की तपती रेत पर इस गांव का साठ वर्षीय बुजुर्ग रामस्वरूप तेजी से ऊंट गाड़ी दौड़ा रहा है। तेजी इसलिए है कि कहीं वह नहर में से पानी लाने में पीछे न रह जाए। इसीलिए करीब दर्जनभर ड्रम ऊंट गाड़ी पर रखकर रामस्वरूप तेजी से नहर की ओर जा रहा है। तेजी इसलिए भी है कि नहर में करीब ब्यालिस दिन बाद पानी आया है और वो भी बहुत कम। पीने के लिए काम चल जाए, यही बहुत है, फसल की काश्त एवं पकी हुई फसल को सिंचित करना यहां के लोगों को नामुमकिन सा लगता है। यह स्थिति केवल गुसाईंआना गांव की नहीं। राजस्थान की सीमा से सटे जोगीवाला, खेड़ी, कुम्हारिया, कर्मशाना, धोलपालिया, नीमला जैसे दर्जनों गांवों में है। पिछले करीब डेढ़ माह से यहां पानी को लेकर त्राहिमाम का आलम है। ताल सूखे है, नहरों में पानी नहीं है, पुराने कुएं भी सूख गए हैं। ऐसे में बिन पानी के लोगों का हलक सूख गया है। हालात यह है कि यहां के लोग राजस्थान के बोर्डर पर स्थित गांवों से मोल पानी लाने को विवश हैं। गांव खेड़ी के गांव चोड़ी के कृष्ण कुमार 'राजस्थान बॉर्डर पर खिंचवाणे गाम मूं 300 तई लेगे 600 रुपए में पाणी को कैंटर ल्याया।Ó से जाहिर होता है कि इलाके में पेयजल की कितनी किल्लत है। दरअसल मौसम का मिजाज अभी गर्म हुआ है। अभी पारा 38 डिग्री के करीब है। इस समय गेहूं की फसल पकी हुई है। जिला में करीब 107 नहरें हैं। सौ से अधिक नलकूप आधारित पेयजलापूॢत के केंद्र गांवों में स्थापित हैं। अधिकांश जलघर नहरों पर आधारित हैं। नहरों में इन दिनों चार गु्रपों में बारीबंदी के लिहाज से पानी छोड़ा जा रहा है। करीब 60 से अधिक नहरें इस समय सूखी हैं। एक बार बारबंदी होती है तो 42 दिन के बाद नहर में पानी आता है। ऐसे में किसान अपनी फसल को ङ्क्षसचित नहीं कर पाए। गांव खेड़ी के फूसाराम, लालचंद, काशीराम कहते हैं कि औसतन एक एकड़ में अक्सर 50 मण तक गेहूं का उत्पादन होता है। इस बार नहरों में पानी नहीं रहा। इसलिए अंतिम चरण में फसल को ङ्क्षसचित न कर सके। इलाके में भूजल 500 फीट पर पहुंच गया है और भूजल खारा है। ऐसे में किसान कुछ न कर सके। किसानों ने बताया कि इस बार 20 से 25 मण प्रति एकड़ ही उत्पादन होगा। इसी तरह से गांव गुसाईंआना के रामस्वरूप, राकेश बताते हैं कि पिछले एक माह से पानी की इतनी किल्लत है कि राजस्थान इलाके से पानी मोल खरीदकर लाने को लाचार हैं। कर्मशाना, धोलपालिया, नीमला एवं कुम्हारिया गांव में भी ऐसे ही हालात हैं। गांव कुम्हारिया में एक चौक पर गांव के लोग ताश खेलते मिले। खेतिहर लिहाज से काम के इन दिनों में ताश खेलने का कारण पूछा तो ग्रामीण ठेठ भाषा में हंसते हुए बोले 'पीण गो तो पाणी कोनी, बिजाई कूकर करां, बिजाई खातर पाणी कोनी अर इह खातर बेला हां, जदी तो अठे बैठेया ताश गी काट पर काट मारण लाग्रय हां।Ó गहरी पैठ से देखें तो इस बार जिला में दो लाख 75 हजार हैक्टेयर में गेहूं की काश्त हुई। गेहूं की बिजाई के समय से ही जिला में नहरी पानी की किल्लत है। भाखड़ा से निर्धारित पानी से करीब 30 फीसदी पानी कम मिल रहा है। ऐसे में उत्पादन पर असर पडऩा लाजिमी है। इन दिनों नहरों में 42 दिन बाद पानी छोड़ा जा रहा है और यह पानी भी महज जलघरों में पेयजलापूॢत के लिए। ङ्क्षसचाई के लिए इस पानी के प्रयोग पर एक प्रकार से मनाही है। गांव कुम्हारिया के लोगों ने बताया कि दो दिन पहले नहर में 40 दिन बाद पानी आया। पानी को पूरी तरह से रोककर मोगे लगाकर पहले जोहड़ भरा, ताकि पेयजल का प्रबंध हो सके। बिजाई के लिए तो यह पानी अलबत्ता पर्याप्त नहीं है और दूसरा इसे ङ्क्षसचाई के लिए प्रयेाग पर मनाही भी है। गांव के लोगों ने बताया कि पिछले करीब डेढ़ माह में जोगीवाला, कुम्हारिया, खेड़ी एवं गुसाईंआना गांवों में लोगों ने पानी मोल खरीदा और इस पर एक प्रकार से लाखों रुपए खर्च डाले। यहां के लोग सिरसा के निकट स्थित गांव नेजिया या राजस्थान के ङ्क्षखचवाणा गांव से मोल पानी खरीद रहे हैं। जाहिर है कि पेयजल को लेकर मारामारी का आलम है और अभी गर्मी का मौसम शुरू हुआ है। पेयजल किल्ल्त एक जगह है और दूसरी दिक्कत इस बार फसल को पर्याप्त ङ्क्षसचाई न मिलने से गेहूं के उत्पादन पर भी निश्चित रूप से असर पड़ेगा। महकमा भी ङ्क्षचता में दरअसल नहरी पानी की किल्लत के चलते पेयजलापूॢत की जिम्मेदारी संभालने वाला जलदाय महकमा भी ङ्क्षचता में है। जलदाय महकमा डिवीजन दो के कार्यकारी अभियंता विक्रम ङ्क्षसह भी मानते हैं कि राजस्थान के साथ लगते गांवों में बड़ी दिक्कत है। वे बताते हैं कि डिवजीन दो में 176 गांव हैं, जिनमें से 145 के करीब कैनाल बेसड जबकि 22 नलकूप आधारित पेयजल केंद्र हैं। जाहिर है कि नहरी आधारित 145 जलघर हैँ और ऐसे में नहरों में पानी न होने से जलघरों की डिग्गियां सूखना भी स्वाभाविक सी बात है। कार्यकारी अभियंता ने बताया कि टेल पर जो गांव पड़ते हैं, वहां लिफ्टिंग के जरिए पानी ले जाया जा रहा है ताकि पेयजलापूॢत की जा सके। उन्होंने माना कि परेशानी तो है, लेकिन विभाग दिक्कत दूर करने को लेकर शिद्दत के साथ कदम उठा रहा है। राजस्थान कैनाल से आता है पानी जहां राजस्थान सीमा से सटे गांवों के लोग पानी मोल खरीद रहे हैं, वहीं गहरी पैठ से देखने पर यह भी पता चलता है कि राज्य के बहुत से गांवों में राजस्थान के जरिए पेयजलापूॢत होती है। ऐलनाबाद इलाके के गांव बचेर, धोलपालिया, बेहरवाला, नीमला एवं काशी का बास राजस्थान से सटे हुए हैं और ये गांव टेल पर पड़ते हैं। इन गांवों में जलघर हैं, लेकिन नहरी पानी नहीं पहुंचता है। ऐसे में जलदाय महकमा यहां पर राजस्थान कैनाल के जरिए पानी की लिफ्टिंग कराता है। अलबत्ता राजस्थान कैनाल में भी इस समय पर्याप्त पानी नहीं है। ऐसे में सीमा पर सटे इन गांवों की परेशानी अभी भी दूर नहीं हुई है। Sandeep Bhurtana

Monday, December 13, 2010

सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सभा में उछाला जूता

हिसार. सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने माइक थामा ही था कि भीड़ में से उछलकर जूता आया। कुछ पुलिसकर्मी जूते की तरफ लपके तो कुछ ने एक आदमी को दबोच लिया। पुलिस उसे रैली से निकाल कर ले गई।

सीएम ने सभा को शांत किया—शुभ कामों में ऐसी चीजें होती हंै तो फिर नजर नहीं लगती। जैसा उन्होंने 22 अगस्त को महेंद्रगढ़ में भी ऐसी ही घटना के बाद कहा था। जूता फेंकने वाला अजीत गांव किरमारा का बर्खास्त फौजी है। हांसी की वकील कॉलोनी में रहता है। आर्मी में नौकरी के दौरान लंबी गैरहाजिरी के बाद 1991 में उसका कोर्ट मार्शल हुआ था। तब से वह खेतीबाड़ी करता है।

अजीत बोला—किसानों को नकली बीज और खाद मिल रही है। कोई कार्रवाई नहीं हो रही। एसपी ने बताया कि अजीत का मानसिक रोग विशेषज्ञ से इलाज चल रहा है। उसे छोड़ दिया गया है। अजीत के भाई रोडवेज कर्मी नेता दलबीर किरमारा का कहना है कि इस घटना से उनका कोई वास्ता नहीं है।