* नशे की अंधेरी दुनिया में उजाला खो रही हैं बहुत सी महिलाएं
* तस्करी के आरोप में दो साल में 60 महिलाएं काबू
सिरसा \घुंघट की आड़ में महिलाएं मादक पदार्थों की तस्करी कर रही हैं। चूल्हे की चौखट से बाहर निकलकर महिलाएं नशे की अंधेरी दुनिया में भी कदम रख चुकी हैं। अकेले सिरसा जिला में पिछले दो बरस में ही पुलिस ने पांच दर्जन महिलाओं को तस्करी के आरोप में दबोचा है। सूबे में दो बरस में करीब 250 महिलाओं को तस्करी करते हुए धरा गया है। ऐसे में नशे की शुष्क बंदरगाह के रूप में बदनाम हो चुके जिला सिरसा में सीमावर्ती इलाकों में महिलाएं तस्करी जैसे गोरखधंधे में बड़े पैमाने पर संलिप्त हो रही हैं। दरअसल सिरसा जिला पंजाब व राजस्थान की सीमा से सटा है। तस्करी के लिए यह इलाका बंदरगाह के रूप में बदनाम है। नशे के ट्रांजिट प्वाइंट बने इस इलाके में अब महिलाएं भी तस्करी करने लगी हैं। वर्ष 2008 में जिला पुलिस ने 45 जबकि पिछले साल 15 महिलाओं को तस्करी करते हुए दबोचा। पुलिस सूत्रों के अनुसार पंजाब से सटे रोड़ी, डबवाली, कालांवाली इलाके में अब बड़े तस्कर महिलाओं को माध्यम बनाने लगे हैं। बहुत से तस्कर अपनी बीवी आदि का सहारा लेते हैं तो बहुत सी महिलाएं आॢथक महत्वाकांक्षा के चलते इस नापाक धंधे में कूद रही हैं। दबी जबान में पुलिस जवान यह भी स्वीकारते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में कम नाकेबंदी एवं पर्याप्त महिला पुलिस बल न होने के चलते भी बहुत बार महिला तस्कर पुलिस के चंगुल से निकल जाती हैं। इस समय जिला में 1200 के करीब पुलिस बल है। महिला पुलिस बल की संख्या सैंकड़े से भी कम करीब 80 है। जिला में महज एक ही पुलिस इंस्पैक्टर एवं चंद महिला सब इंस्पैक्टर है। ऐसे में नाकेबंदी के दौरान बहुतेरी बार पुरुष पुलिस कर्मी संदिग्ध महिलाओं की तलाशी नहीं ले सकते। वैसे राज्यभर में भी कुल 42 हजार पुलिस बल में से महिला पुलिस बल की संख्या करीब 1700 ही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो डबवाली, कालांवाली जैसे इलाकों में बहुत सी महिलाएं छुपाकर मादक पदार्थ लेकर आती हैं और उसे सीमा बार दूसरे सूबे पंजाब में ले जाती हैं। वर्ष 2008 में डबवाली सदर पुलिस ने दर्जन भर से अधिक ऐसी महिलाओं को काबू किया जो पंजाब से ताल्लुक रखती थी। इनमें से बहुत सी इस धंधे में अपने पति या किसी अन्य रिश्तेदार के नशे की लत की जकडऩ की वजह से आईं। इस गोरखधंधे से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि अब बहुत से तस्कर महिलाओं की मदद लेने लगे हैं। ऐसा करने से उन्हें थोड़ी आसानी होती है। अधिक सेफ्टी रहती है और वे पुलिस को चकमा भी देने में कामयाब हो जाते हैं। ओढां थाना के प्रभारी बताते हैं कि 'बहुत से तस्कर अपनी बीवी, भाभी, बहन की मदद के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी करते हैं।Ó उन्होंने जोड़ा कि अधिकांश महिलाएं किसी तस्कर के संपर्क में आकर या अपने पति की नशे की लत की पूूॢत करने के लिए तस्करी करती हैं। उन्होंने बताया कि कुछ अरसा पहले उन्होंने एक महिला को एक किलोग्राम चूरापोस्त सहित काबू किया था। उस महिला की आॢथक दशा दयनीय थी और उसका पति नशे की लत से ग्रस्त था और स्वयं तस्करी करने में असमर्थ हो गया। ऐसे में उस महिला को अपने पति की नशे की लत की पूॢत के लिए तस्करी जैसे नापाक धंधे में कूदना पड़ा।
ङ्क्षचताप्रद बात यह भी है कि जहां तस्करी जैसे गोरखधंधे में महिलाओं की संलिप्तता बढ़ी है, वहीं कालांवाली, रोड़ी जैसे इलाकों में कुछेक महिलाएं नशे की जकडऩ में भी हैं। नशा मुक्ति केंद्र कालांवाली की प्रभारी वीरपाल कौर बताती हैं कि 'उनके केंद्र में सालभर में करीब आधा दर्जन से अधिक महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। अधिकांश महिलाओं को भूक्की एवं नशे की गोलियों की लत होती है।Ó जाहिर है कि नशे का यह धंधा मौत के सौदागरों के लिए मुनाफे का धंधा बन गया है और वे अब इसमें महिलाओं का भी आश्रय लेने लगे हैं। यह भी जाहिर है कि इस दिशा में पुलिस को शिद्दत के साथ प्रयास करने होंगे।
Sandeep Bhurtana
Wednesday, December 15, 2010
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